उस पार का इंतेज़ार


A Poem by Ashay Abbhi


Meet the participants of the Building Peace Program 2014!

मेरे हिन्दुस्तान की तंग गलियों से होता       
खुलता था दरवाज़ा तेरे पाकिस्तान का..
वो तेरा जहाँ जिसकी ज़मीन है मुझसी,  
यह मेरा जहाँ तेरे आसमान सा..

तेरी अज़ानों की गूंजों में              
मेरी दुआएँ क़ुबूल होती थी..         
तेरे क़ोरान--पाक में ढूंढता,     
निशान मैं अपने भगवान का..

तेरी जानिब से आई ठंडी हवा..   
दस्तक देती थी मेरे दरवाज़े पर
मेरी बस्ती में गिरे पत्ते,            
बताते हाल तेरे गुलिस्तान का..

मेरी दिवाली के दियों की लौ से,
रौशन होता था तेरा समा..         
वो तेरी ईद की सेवैयों में छुपा,  
मिलता था सलाम उस बूढ़ी मा का..

ठिठुरती रातों में तेरे क़ोयलों को,           
मेरी आग ने गर्मी की चादर दी थी..        
गर्मी में तपती मेरी पेशानी पे,    
घुलता रेशा तेरे लिबास का..

इस सड़क पर घर है मेरा वहीं,   
जहाँ तेरा घर हुआ करता था..    
आज भी है वो ही बस्ती, वो ही मोहल्ला,           
फ़र्क है तो बस किनारे के किस पार का..

कल तक तेरी चौखट मेरी राहदार थी,     
मेरा कमरा था तेरा राज़दार..     
मुद्दत हुई तेरी चौखट दिखे उसे,  
ग़मगीं है घर मेरा बीमार सा..

काटी है किसने यह राहें हमारी,  
किसने खींची यह लकीरों की दीवार..      
सोचता हूँ जो तेरी आँखों के बारे में,        
दिखता है एक आँसू इस पार के इंतेज़ार का..

लिखती है मेरी कलम तेरी स्याही से,     
मेरी ग़ज़ल तेरी धुन पिरोती है..
कुछ दूर हो गये हैं तेरे लफ्ज़ मुझसे,       
कुछ तुझे है इंतेज़ार मेरी आवाज़ का..

इन कूचों में खामोश कुछ सदायें,           
अंधेरों में गुम तस्वीरों से कहती हैं..       
वो तेरे हिन्दुस्तान के आईने में,
अक्स मिलता है मेरे पाकिस्तान का.



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Ashay Abbhi is currently based out of Chennai, India. Enjoying good literature, Sufism and music, Ashay works as an analyst in the field of energy studies, with a specialisation in Oil and Gas. He wields the pen every now and then when his muse visits him, dabbling with writing out a bit of poetry and prose. Ashay is a volunteer with the Red Elephant Foundation, and writes op-ed styled articles for many international outlets on contemporary energy issues and surrounding geopolitical angles, besides also writing poetry and short stories that have been published in many outlets.
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